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छतरपुर । श्री कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में विभिन्न देशों से आये पर्यावरण विदों ने अपनें विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी में एनवायरमेंट स्ट्रैस एण्ड इकोलॉजिकल चैलेंज विषय पर देश विदेश से आये विभिन्न विद्वानों ने अपनें विचार व्यक्त किये । प्रथम दिवस का कार्यक्रम उद्घाटन सत्र से प्रांरभ हुआ जिसके मुख्य अतिथि हमीरपुर महोषा के सांसद कुँ पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल थे विशिष्ट अतिथि जिला छतरपुर के कलेक्टर श्री मोहित बुंदस एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालयके कुलपति प्रो. गोविंद सिंह थे। वहीं मुख्य वक्ता के तौर पर म.प्र. निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार पाण्डेय रोजगार निर्माण विभाग के चेयरमैन पुष्पेंद्र सिंह उपस्थित रहें। वहीं कार्यक्रम के दौरान श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. वृजेन्द्र सिंह गौतम एवं चैयरमैन श्री पुष्पेंद्र सिंह गौतम नें अपने पिता स्व.बलबीर सिहं गौतम के नाम से स्पेशल पुरस्कार डॉ. अखिलेश कुमार पण्डेय, श्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार कु. पुष्पेन्द्र सिहं चन्देल एवं प्रो. टी. आर. थापक को लाइफटाइन अचीवमैट पुरस्कार से सम्मानित किया और विश्वविद्यालय की छात्र छात्राओं नें सरस्वती बंदना एवं कुल गान कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।

विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. पुष्पेंद्र सिंह गौतम में अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय प्रारम्भ करनें का उद्देश्य बुन्देलखण्ड में न्यूनतम शुल्क में उत्कृष्ट एंव कौशलयुक्त शिक्षा देना हमारा उद्देश्य है यही कारण है कि हमारे विश्वविद्यालय के प्रथम सत्र में ही लगभग तीन हजार से अधिक श्री चंदेल में कहा कि विश्वविद्यालय में बुन्देलखण्ड की आवश्यकता को देखते हुये नयी खोजें की जानी चाहिये तबकि हमारे बुन्देलखण्ड से पलायन रूक सके विशेष रूप से कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अविष्कार वरदान सावित हो सकते हैं। विशिष्ट अतिथि जिला कलेक्टर श्रीं मोहित बुंदस नें भी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने हेतु तैयार रहनें के लिए आगाह किया। और साथ ही श्री कृष्णा विश्वविद्यालय द्वारा तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार को अनूठा कार्यक्रम बताया और यह भी कहा की इस सैमीनार के दौरान जिन बिन्दुओं पर चर्चा होगी उन मुख्य बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन भी हर सम्भव प्रयास करेगा। जिससे की जिले के लोगों को लाभ मिल सके।

मुख्य वक्ता श्री अखिलेश कुमार पाण्डेय जी ने पर्यावरण और टेक्नॉलॉजी दोनों पर विस्तार से प्रकार डाला। टेक्नोलॉजी से हमारी युवा पीढ़ी अत्यंत प्रभावित हो रही है उन्होंने बताया कि युवा लगभग 7 घंटे मोबाइल पर सोशल मीडिया के जरिये बिताते है अत: हमें अब एनवायरमेंटल एनर्जी का प्रयोग करना होगा जिससे अर्थव्यवस्था , रोजगार, और पर्यावरणीय शक्ति का प्रयोग संतुलित करना होगा। डॉ. हरिसिंह और विश्वविद्यालय सागरसे पधारे भूगोल के सेवा निवृत्त प्राध्यापक प्रो. श्रीकमलशर्मा नें विकास के साथ पर्यावरण का सन्तुलन स्थापित करने की बात कही ।वहीं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. वृजेन्द्र सिंह गौतम ने पर्यावरणको सन्तुलित रखनें हेतु जनता से अपील की कि उन्हें यदि अधिक समय तक खुले में स्वच्छ वायु से सांस लेना है तो प्राकृतिक संसाधनों से बनी वस्तुओें का अधिक से अधिक प्रयोग करें ।वहीं सांसद कुं. पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल से अपील की कि वे सरकार के माध्यमसे आर्गेनिक खेती का अधिक समर्थन मूल्य दिलाये जानें की आग्रह किया। मुख्य वक्ता डॉ. अखिलेश कुमार पाण्डेय को बलवीर सिंह गौतम पुरूष्कार से सम्मानित किया गया वही श्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार कुं पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को दिया गया तथा प्रो. टी. आर. थापक मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क रेग्यूलेटरी समिति के अध्यक्षजी को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा साथ ही विश्वविद्यालय में आगन्तुक अतिथियों ने विश्वविद्यालय स्मारिका का विमोचन भी किया। समापन सत्र में प्रो. शर्मा पूर्व कुलपति जोधपूर विश्विविद्यालय ने पर्यावरण में जीव जन्तुओंका योगदान विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा कार्यकम में आये सभी अतिथियों शोधार्थियों एवं छात्र छात्राओं का आभार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गोविन्द सिंह ने व्यक्त किया।

श्री कृष्णा विश्वविद्यालय में आयोजित इनटरनेशनल एनव्यरमैनट स्टैरस एडं परस्पेक्टिव विषय पर दूसरे दिन का कार्य क्रम संगोष्ठी के द्वितिय दिन मुख्य अतिथि के तौर पर वृजेन्द्र सिंह राठौर वाणिज्य मंत्री म.प्र. शासन , डॉ. एल. एस सोलंकी कुलसचिव महाराजाछात्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर एवं श्री पदम प्रताप सिंह फिल्म टी.वी. निर्माता निर्देशक मुम्बई वहीं संरक्षक के तौर पर श्री तपन भौमिक प्रतिकुलपति श्री कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर , श्री डॉ. वृजेन्द्र सिंह गौतम कुलाधिपति श्री कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर कपिल देव मिश्रा कुलपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपूर होगें।